Ganesh Kavach in Hindi Lyrics PDF | श्री गणेश कवच
What is Ganesh Kavach?
Ganesh Kavach is a sacred Hindu protective prayer dedicated to Lord Ganesha, the remover of obstacles and the god of wisdom, success, and prosperity.
The word “Kavach” means “armor” or “shield.” In Hindu spirituality, a kavach is believed to provide divine protection from negative energies, fear, obstacles, and difficulties in life.
Devotees chant Ganesh Kavach to seek blessings, mental peace, spiritual strength, and protection.
Ganesh Kavach In SansKrit/Hindi Lyrics
श्री गणेश कवच हिंदी में
गौर्युवाच
एषोऽतिचपलो दैत्यान्बाल्येऽपि नाशयत्यहो ।
अग्रे किं कर्म कर्तेति न जाने मुनिसत्तम ॥ १ ॥
माता गौरी (पार्वती) ने कहा- हे मुनिश्रेष्ठ! यह बालक (गणेश) बहुत चंचल है और बाल्यावस्था में ही दैत्यों का नाश कर रहा है। आगे चलकर यह क्या करेगा, मैं नहीं जानती।
दैत्या नानाविधा दुष्टाः साधुदेवद्रुहः खलाः ।
अतोऽस्य कण्ठे किञ्चित्त्वं रक्षार्थं बद्धुमर्हसि ॥ २ ॥
अनेक प्रकार के दुष्ट, साधुओं और देवताओं से द्रोह करने वाले पापी राक्षस मौजूद हैं। इसलिए, आप इनके गले में रक्षा के लिए कोई ‘कवच’ बांध दें。
श्री मुनिरुवाच
ध्यायेत् सिंहगतं विनायकममुं दिग्बाहु माद्ये युगे
त्रेतायां तु मयूर वाहनममुं षड्बाहुकं सिद्धिदम् । ई
द्वापरेतु गजाननं युगभुजं रक्तांगरागं विभुम् तुर्ये
तु द्विभुजं सितांगरुचिरं सर्वार्थदं सर्वदा ॥ ३ ॥
ऋषि बोले- सतयुग में दस हाथ धारण करके सिंह पर सवार होने वाले विनायक जी का ध्यान करें। त्रेता युग में छः हाथ धारण करके व मयूर की सवारी करने वाले, द्वापर युग में चार भुजावाले, नाव में अवतरित रक्तवर्ण गजानन का ध्यान करें तथा कलयुग में दो हाथ व सुंदर श्वेत स्वरूप धारण करके अवतार लेने वाले और अपने भक्तों को सभी प्रकार के सुख देने वाले गणेश जी का ध्यान करें।
विनायक: शिखां पातु परमात्मा परात्पर:।
अतिसुंदरकायस्तु मस्तकं सुमहोत्कट:।।४।।
परमात्मा विनायक आप शिखा स्थान में हमारी रक्षा करें। अतिशय सुंदर शरीर वाले अत्यंत समर्थवान गणेश जी मस्तक में रक्षा करें।
ललाटं कश्यप: पातु भ्रूयुगं तु महोदर:।
नयने भालचन्द्रस्तु गजास्यस्तवोष्ठपल्लवौ।।५।।
कश्यप के पुत्र गणेश ललाट में हमारी रक्षा करें, विशाल उधर वाले गणेश जी हमारी भोहों में रक्षा करें। भालचंद्र गणेश जी हमारी आंखों की रक्षा करें और गज बदन गणेश मुख्य की एवं दोनों होठों की रक्षा करें।
जिह्वां पातु गणाक्रीडश्रिचबुकं गिरिजासुत:।
पादं विनायक: पातु दन्तान् रक्षतु दुर्मुख:।।६।।
शिवगणों में बराबर क्रीड़ा करने वाले गणेश जी हमारे ठोडी की रक्षा करें, गिरिजेश पुत्र गणेश जी हमारे तालु की रक्षा करें, विनायक हमारी वाणी की रक्षा करें और विघ्नहर्ता गणेश जी दांतो की रक्षा करें।
श्रवणौ पाशपाणिस्तु नासिकां चिंतितार्थद:।
गणेशस्तु मुखं कंठं पातु देवो गणञज्य:।।७।।
हाथों के मध्य पाश धारण करने वाले गणेश जी दोनों कानों की रक्षा करें, मनोवांछित फल देने वाले गणेश जी नाक की रक्षा करें। गणों के अधिपति गणेश जी हमारे मुख एवं गले की रक्षा करें।
स्कंधौ पातु गजस्कन्ध: स्तनौ विघ्नविनाशन:।
ह्रदयं गणनाथस्तु हेरंबो जठरं महान्।।८।।
गजस्कंध गणेश जी स्कंधों की रक्षा करें। विघ्नों के विनाशक गणेश जी हमारे स्तनों की रक्षा करें। गणनाथ गणेश हमारे हृदय की रक्षा करें और परम श्रेष्ठ हेरम्ब हमारे पेट की रक्षा करें।
धराधर: पातु पाश्र्वौ पृष्ठं विघ्नहर: शुभ:।
लिंगं गुज्झं सदा पातु वक्रतुन्ड़ो महाबल:।।९।।
धरणीधर गणेश जी हमारे दोनों बांहों की रक्षा करें। सर्वमंगल व विघ्नहर्ता गणेश जी आप हमारे पीठ की रक्षा करें। वक्रतुंड और महा सामर्थवान गणेश जी हमारे लिंग व गुह्म की रक्षा करें।
गणाक्रीडो जानुजंघे ऊरू मंगलमूर्तिमान्।
एकदंतो महाबुद्धि: पादौ गुल्फौ सदाऽवतु।।१०।।
गणक्रीडा नाम धारण करने वाले गणेश जी आप हमारे दोनों घुटनों के जांघों की रक्षा करें। मंगलमूर्ति दोनों ऊरू की रक्षा करें। एकदंत गणेश जी आप हमारे दोनों पांव और महाबुद्धि वाले गणेश जी हमारे गुल्फों की रक्षा करें।
क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरक:।
अंगुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशन।।११।।
शीघ्र प्रसन्न होने वाले गणेश जी दोनों बाहुओं की रक्षा करें, भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाले हमारे हाथों की रक्षा करें। हाथों में पदम धारण करने वाले और शत्रुओं का नाश करने वाले गणेश जी आप हमारी उंगलियों तथा नाखूनों की रक्षा करें।
सर्वांगनि मयूरेशो विश्र्वव्यापी सदाऽवतु।
अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतु: सदाऽवतु।।१२।।
संपूर्ण विश्वव्यापी मयूरेश सर्वांगों अर्थात सभी अंगों की रक्षा करें। जो स्थान स्त्रोत में नहीं कहे गए हो उनकी रक्षा धूम्रकेतु नामक गणेश जी महाराज करें।
आमोदस्त्वग्रत: पातु प्रमोद: पृष्ठतोऽवतु।
प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायक:।।१३।।
प्रसन्नचित्त नाव में विचरण करने वाले गणेश जी बाजूओं के पीछे की रक्षा करें और बाजुओं के आगे की रक्षा करें, बुद्धि के अधिपति पूर्व दिशा में हमारी रक्षा करें तथा सिद्धिदायक आग्नेय दिशा में हमारी रक्षा करें।
दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैर्ऋत्यां तु गणेश्वर:।
प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजगर्णक:।।१४।।
उमा के पुत्र गणेश जी दक्षिण दिशा में हमारी रक्षा करें, गणों के अधिपति नेत्रत्य दिशा में हमारी रक्षा करें। विघ्नहर्ता गणेश जी पश्चिम दिशा में हमारी रक्षा करें और गजकर्ण वायव्य दिशा में हमारी रक्षा करें।
कौबेर्यां निधिप: पायादीशान्यामीशनन्दन:।
दिवोऽव्यादेलनन्दस्तु रात्रौ संध्यासु विघ्नह्रत्।।१५।।
निधि में अधिपति गणेश जी उत्तर दिशा में हमारी रक्षा करें। शिवपुत्र गणेश जी ईशान दिशा में हमारी रक्षा करें, एकदंत गणेश जी आप दिन में हमारी रक्षा करें। विघ्नहर्ता रात्रि व संध्याकाल में हमारी रक्षा करें।
राक्षसासुरवेतालग्रहभूतपिशाचत:।
पाशांकुशधर: पातु रज:सत्त्वतम:स्मृति:।।१६।।
पाश अंकुश धारण करने वाले व सत रज तम तीन गुणों से जाने जाने वाले गणेश जी आप राक्षस, दैत्य, वैताल, ग्रह, भूत पिशाच आदि से हमारी रक्षा करें।
ज्ञानं धर्मं च लक्ष्मीं च लज्जां कीर्तिं तथा कुलम्।
वपुर्धनं च धान्यश्र्च ग्रहदारान्सुतान्सखीन्।।१७।।
ज्ञान, धर्म, लज्जा, कीर्ति, कुल, शरीर, स्त्री, पुत्र, मित्रों की रक्षा करें।
सर्वायुधधर: पौत्रान्मयूरेशोऽवतात्सदा।
कपिलोऽजाबिकं पातु गजाश्रवान्विकटोऽवतु।।१८।।
सर्व आयुध धारण करने वाले गणेश जी पोत्रों की रक्षा करें। कपिल नाम गणेश बकरी, गाय आदि की रक्षा करें। हाथी घोड़ों की रक्षा विकट नाम के गणेश जी करें।
भूर्जपत्रे लिखित्वेदं य: कण्ठेधारयेत्सुधी:।
न भयं जायते तस्य यक्षरक्ष:पिशाचत:।।१९।।
जो उत्कृष्ट बुद्धिमान मनुष्य इस कवच को भोजपत्र पर लिखकर गले में धारण करता है। उसके सामने कभी यक्ष राक्षस व पिशाच नहीं आते।
॥ इति श्री गणेशपुराणे श्री गणेश कवचं संपूर्णम् ॥
Ganesh Kavach in Hindi Lyrics PDF
Ganesh Kavach in English Lyrics PDF
Ganesh Kavach in Gujarati Lyrics PDF
Ganesh Kavach in Marathi Lyrics PDF
गणेश कवच क्या है?
गणेश कवच भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करके शरीर, मन, बुद्धि, परिवार, यात्रा, कार्य तथा सभी दिशाओं में दिव्य सुरक्षा की प्रार्थना है। इसका नियमित पाठ साधक को निर्भयता, सफलता, बुद्धि और मंगल प्रदान करता है। ॥ श्री गणेशार्पणमस्तु ॥
श्री गणेश कवच पाठ का फल
जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से इस गणेश कवच का पाठ करता है:
उसके सभी विघ्न और बाधाएँ दूर होते हैं।
भय, रोग और संकट नष्ट होते हैं।
विद्या, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।
व्यापार, नौकरी और कार्यों में सफलता मिलती है।
परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Benefits of Ganesh Kavach
One who recites this Ganesh Kavach with faith and devotion:
- All obstacles and hindrances are removed.
- Fear, disease, and adversity are destroyed.
- Knowledge, wisdom, and discernment are attained.
- Success in business, employment, and work is achieved.
- Happiness, peace, and prosperity come to the family.
- Lord Ganesha’s special blessings are bestowed.
Ganesh Kavach Meaning:
This Kavach is a prayer for divine protection for the body, mind, intellect, family, travel, work, and in all directions, by remembering the various forms of Lord Ganesha. Regular recitation of this armor bestows fearlessness, success, wisdom, and well-being upon the practitioner. ॥ Shri Ganeshaarpanamastu ॥
How to Chant Ganesh Kavach
Simple Ganesh Kavach Chanting Method
Take a bath and wear clean clothes
Sit in a peaceful place
Light a diya or incense stick
Offer flowers or modak to Lord Ganesha
Chant Ganesh Kavach with devotion
End with Ganesh Aarti or prayer
Best Time to Read Ganesh Kavach
The most auspicious times for Ganesh Kavach are:
- Early morning
- Wednesday
- During Ganesh Chaturthi
- Before starting important tasks
- During meditation or prayer
गणेश कवच से संबंधित सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. गणेश कवच क्या है?
गणेश कवच भगवान गणेश की स्तुति और रक्षा का एक पवित्र स्तोत्र है। इसे पढ़ने से भक्त स्वयं को भगवान गणेश की दिव्य सुरक्षा में अनुभव करते हैं।
2. गणेश कवच का अर्थ क्या है?
“कवच” का अर्थ सुरक्षा कवच होता है। गणेश कवच में भगवान गणेश से प्रार्थना की जाती है कि वे भक्त के शरीर, मन और जीवन की रक्षा करें तथा सभी बाधाओं को दूर करें।
3. गणेश कवच के क्या लाभ हैं?
गणेश कवच के नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होने की मान्यता है:
जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है।
आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है।
मानसिक शांति प्राप्त होती है।
बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
आध्यात्मिक विकास में सहायता मिलती है।
4. गणेश कवच का पाठ कब करना चाहिए?
गणेश कवच का पाठ प्रतिदिन सुबह किया जा सकता है। इसके अलावा किसी महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा, परीक्षा या नए कार्य की शुरुआत से पहले भी इसका पाठ शुभ माना जाता है।
5. गणेश कवच का महत्व क्या है?
गणेश कवच भक्त को भगवान गणेश की दिव्य सुरक्षा का अनुभव कराता है। यह जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है।
6. गणेश कवच में किस देवता की पूजा की जाती है?
गणेश कवच भगवान श्री गणेश को समर्पित है, जिन्हें गणपति, विनायक, सिद्धिविनायक और विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है।
7. गणेश कवच के पाठ के समय कौन-से अर्पण किए जाते हैं?
पाठ के दौरान सामान्यतः ये अर्पण किए जाते हैं:
दूर्वा घास
लाल फूल
मोदक
नारियल
फल
धूप
घी का दीपक
8. गणेश कवच का पाठ कौन कर सकता है?
गणेश कवच का पाठ कोई भी व्यक्ति कर सकता है। विद्यार्थी, गृहस्थ, व्यवसायी, नौकरीपेशा व्यक्ति और आध्यात्मिक साधक सभी इसका पाठ कर सकते हैं।
9. क्या शुरुआती लोग भी गणेश कवच का पाठ कर सकते हैं?
हाँ। शुरुआती लोग भी इसे सुनकर और सीखकर पाठ कर सकते हैं। भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
10. गणेश कवच का पाठ किन विशेष अवसरों पर किया जाता है?
गणेश कवच का पाठ विशेष रूप से निम्न अवसरों पर किया जाता है:
गणेश चतुर्थी
संकष्टी चतुर्थी
विनायक चतुर्थी
गृह प्रवेश
नए व्यवसाय की शुरुआत
परीक्षा और शिक्षा से जुड़े अवसर
धार्मिक एवं पारिवारिक उत्सव
11. गणेश कवच का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
अधिकांश भक्त इसका पाठ प्रतिदिन एक बार करते हैं। विशेष अनुष्ठानों में इसे 11, 21 या 108 बार भी पढ़ा जाता है।
12. क्या गणेश कवच विद्यार्थियों के लिए लाभकारी है?
हाँ। विद्यार्थी ज्ञान, स्मरण शक्ति, एकाग्रता और परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए गणेश कवच का पाठ करते हैं।
13. क्या गणेश कवच का पाठ घर पर किया जा सकता है?
हाँ। इसका पाठ घर के मंदिर, पूजा कक्ष या किसी भी पवित्र स्थान पर किया जा सकता है।
14. गणेश कवच का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
गणेश कवच भगवान गणेश की शरण में जाने और उनकी कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। यह भक्त को आंतरिक शक्ति, विश्वास और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है।
15. महत्वपूर्ण कार्य से पहले गणेश कवच क्यों पढ़ा जाता है?
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले गणेश कवच का पाठ करके उनकी कृपा और संरक्षण प्राप्त किया जाता है ताकि कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
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