गणेश पूजन मंत्र हिंदी – गणपति पूजा के सभी मंत्र और संपूर्ण क्रम

भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और शुभ कार्यों का अधिपति माना जाता है। विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, धार्मिक अनुष्ठान, परीक्षा, यात्रा या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन किया जाता है।

इस लेख में गणेश पूजन मंत्र हिंदी निर्देशों के साथ दिए गए हैं। दीप प्रज्वलन, संकल्प, ध्यान, आवाहन, षोडशोपचार, दूर्वा अर्चना, नैवेद्य, आरती, प्रदक्षिणा और क्षमा प्रार्थना तक सभी प्रमुख गणपति पूजा मंत्र एक ही स्थान पर पढ़ सकते हैं।

पूजा मंत्रों और उपचारों के क्रम में कुल परंपरा, क्षेत्र और पूजा पद्धति के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। यहां दिए गए मंत्र घर पर की जाने वाली पारंपरिक गणपति पूजा के लिए उपयोगी हैं।

भगवान गणेश के सरल और प्रमुख मंत्र

गणेश मूल मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः।

अर्थ: भगवान गणपति को नमस्कार है।

इस मंत्र का प्रतिदिन 11, 21 या 108 बार जप किया जा सकता है।

वक्रतुंड महाकाय मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ: वक्र सूंड और विशाल स्वरूप वाले, करोड़ों सूर्य के समान तेजस्वी भगवान गणेश, मेरे सभी कार्यों को सदैव निर्विघ्न पूर्ण करें।

गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम एकदंत भगवान गणेश को जानने का प्रयास करते हैं और वक्रतुंड का ध्यान करते हैं। वे हमारी बुद्धि को सही मार्ग पर प्रेरित करें।

गणपति ध्यान मंत्र

गजाननं भूतगणादिसेवितं
कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं
नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

अर्थ: गणों द्वारा सेवा किए जाने वाले, कपित्थ और जामुन के फल स्वीकार करने वाले, माता उमा के पुत्र तथा दुखों का नाश करने वाले विघ्नेश्वर के चरणों को मैं प्रणाम करता हूं।

वैदिक गणपति आवाहन मंत्र

ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे
कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत
आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥

सरल अर्थ: हम सभी गणों के अधिपति, ज्ञानी व्यक्तियों में श्रेष्ठ और हमारी प्रार्थना सुनने वाले गणपति का आवाहन करते हैं।

गणेश पूजन मंत्र हिंदी – संपूर्ण पूजा क्रम

1. दीप प्रज्वलन मंत्र

पूजा की शुरुआत में घी या तेल का दीपक जलाएं।

दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

या:

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

2. आचमन मंत्र

दाहिने हाथ में थोड़ा साफ जल लेकर तीन बार आचमन करें:

ॐ केशवाय नमः।
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ माधवाय नमः।

इसके बाद हाथ धोते हुए कहें:

ॐ गोविन्दाय नमः।

3. प्रारंभिक स्मरण मंत्र

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

अर्थ: शुभ्र वस्त्र धारण करने वाले, चंद्रमा के समान उज्ज्वल और प्रसन्न मुख वाले परमदेव का ध्यान करने से सभी विघ्न शांत हों।

4. गणेश पूजा संकल्प मंत्र

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का संकल्प करें:

मम सकुटुम्बस्य क्षेम-स्थैर्य-आयुरारोग्य-ऐश्वर्याभिवृद्ध्यर्थं, सकलविघ्ननिवारणार्थं, श्रीमहागणपतिप्रीत्यर्थं पूजनं करिष्ये।

हिंदी अर्थ: अपने और अपने परिवार के कल्याण, स्थिरता, दीर्घायु, स्वास्थ्य, समृद्धि और सभी विघ्नों के निवारण के लिए मैं श्री महागणपति का पूजन करता या करती हूं।

5. भगवान गणेश का ध्यान मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

या:

एकदन्तं चतुर्हस्तं पाशमङ्कुशधारिणम्।
रदं च वरदं हस्तैर्बिभ्राणं मूषकध्वजम्॥

6. गणपति आवाहन मंत्र

फूल और अक्षत हाथ में लेकर भगवान गणेश का आवाहन करें:

अत्रागच्छ जगद्वन्द्य सुरराजार्चितेश्वर।
अनाथनाथ सर्वज्ञ गौरीगर्भसमुद्भव॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि।

घर के मंदिर में पहले से स्थापित स्थायी गणेश मूर्ति के लिए औपचारिक आवाहन आवश्यक नहीं है। भगवान को प्रणाम करके पूजा शुरू की जा सकती है।

7. आसन अर्पण मंत्र

भगवान के सामने फूल या अक्षत रखकर आसन अर्पित करें:

मौक्तिकैः पुष्परागैश्च नानारत्नैर्विराजितम्।
रत्नसिंहासनं चारु प्रीत्यर्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। आसनं समर्पयामि।

8. पाद्य अर्पण मंत्र

भगवान के चरण धोने के भाव से प्रतीकात्मक जल अर्पित करें:

गजवक्त्र नमस्तेऽस्तु सर्वाभीष्टप्रदायक।
भक्त्या पाद्यं मया दत्तं गृहाण द्विरदानन॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। पादयोः पाद्यं समर्पयामि।

9. अर्घ्य अर्पण मंत्र

गौरीपुत्र नमस्तेऽस्तु शङ्करप्रियनन्दन।
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गन्धपुष्पाक्षतैर्युतम्॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। अर्घ्यं समर्पयामि।

10. आचमनीय जल अर्पण मंत्र

अनाथनाथ सर्वज्ञ गीर्वाणवरपूजित।
गृहाणाचमनं देव तुभ्यं दत्तं मया प्रभो॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। आचमनीयं समर्पयामि।

11. पंचामृत स्नान मंत्र

यदि गणेश मूर्ति धातु, पत्थर या अभिषेक के लिए उपयुक्त सामग्री की बनी हो, तो पंचामृत स्नान कराया जा सकता है:

दधिक्षीरसमायुक्तं मध्वाज्येन समन्वितम्।
स्नानं पञ्चामृतैर्देव गृहाण गणनायक॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। पञ्चामृतस्नानं समर्पयामि।

महत्वपूर्ण सूचना: मिट्टी, शाडू मिट्टी, प्लास्टर या रंगीन मूर्ति पर दूध, जल या पंचामृत न डालें। फूल से कुछ बूंदें छिड़ककर प्रतीकात्मक स्नान कराएं।

12. शुद्ध जल स्नान मंत्र

गङ्गादिसर्वतीर्थेभ्य आहृतैरमलैर्जलैः।
स्नानं कुरुष्व भगवन्नुमापुत्र नमोऽस्तु ते॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।

13. वस्त्र अर्पण मंत्र

रक्तवस्त्रद्वयं चारु देवयोग्यं च मङ्गलम्।
शुभप्रदं गृहाण त्वं लम्बोदर हरात्मज॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि।

वस्त्र उपलब्ध न हो तो अक्षत अर्पित करके वस्त्र समर्पण का भाव रखा जा सकता है।

14. यज्ञोपवीत अर्पण मंत्र

राजतं ब्रह्मसूत्रं च काञ्चनं चोत्तरीयकम्।
गृहाण सर्वधर्मज्ञ भक्तानामिष्टदायक॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। यज्ञोपवीतं समर्पयामि।

15. चंदन और गंध अर्पण मंत्र

चन्दनागरुकर्पूरकस्तूरीकुङ्कुमान्वितम्।
विलेपनं सुरश्रेष्ठ प्रीत्यर्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। गन्धान् समर्पयामि।

16. सिंदूर अर्पण मंत्र

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। सिन्दूरं समर्पयामि।

यदि सिंदूर लगाने से मूर्ति का रंग खराब हो सकता हो तो उसे सामने रखी थाली में अर्पित करें।

17. अक्षत अर्पण मंत्र

अक्षतान् धवलान् दिव्यान् शालीयांस्तण्डुलान् शुभान्।
हरिद्राचूर्णसंयुक्तान् सङ्गृहाण गणाधिप॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। अक्षतान् समर्पयामि।

18. फूल अर्पण मंत्र

सुगन्धीनि च पुष्पाणि जाती-कुन्दमुखानि च।
गृहाण गणनाथ त्वं भक्त्या दत्तानि मे प्रभो॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। नानाविधपरिमलपुष्पाणि समर्पयामि।

19. दूर्वा अर्पण मंत्र

भगवान गणेश को साफ और ताजी दूर्वा अर्पित करते हुए कहें:

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि।

या प्रत्येक दूर्वा अर्पित करते समय:

ॐ गं गणपतये नमः।

कुछ परंपराओं में 21 दूर्वा या 21 दूर्वा की गांठें अर्पित की जाती हैं। उपलब्धता के अनुसार एक साफ गुच्छा भी चढ़ाया जा सकता है।

भगवान गणेश के सोलह नाम – नाम अर्चना मंत्र

फूल, अक्षत या दूर्वा अर्पित करते हुए निम्न सोलह नाम बोलें:

ॐ सुमुखाय नमः।
ॐ एकदन्ताय नमः।
ॐ कपिलाय नमः।
ॐ गजकर्णकाय नमः।
ॐ लम्बोदराय नमः।
ॐ विकटाय नमः।
ॐ विघ्ननाशाय नमः।
ॐ विनायकाय नमः।
ॐ धूम्रकेतवे नमः।
ॐ गणाध्यक्षाय नमः।
ॐ भालचन्द्राय नमः।
ॐ गजाननाय नमः।
ॐ वक्रतुण्डाय नमः।
ॐ शूर्पकर्णाय नमः।
ॐ हेरम्बाय नमः।
ॐ स्कन्दपूर्वजाय नमः।

भगवान गणेश के बारह नामों का मंत्र

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥

विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥

अर्थ: शिक्षा आरंभ, विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा, संघर्ष और संकट के समय भगवान गणेश के इन बारह नामों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करना चाहिए।

20. धूप अर्पण मंत्र

दशाङ्गं गुग्गुलोपेतं सुगन्धं सुमनोहरम्।
उमासुत नमस्तुभ्यं गृहाण वरदो भव॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। धूपमाघ्रापयामि।

21. दीप अर्पण मंत्र

साज्यं त्रिवर्तिसंयुक्तं वह्निना द्योतितं मया।
गृहाण मङ्गलं दीपं त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। दीपं दर्शयामि।

22. नैवेद्य अर्पण मंत्र

मोदक, लड्डू, फल, गुड़-नारियल या कोई सात्त्विक भोजन अर्पित करें:

शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च।
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। नैवेद्यं समर्पयामि।

पंचप्राण नैवेद्य मंत्र

नैवेद्य अर्पित करते समय कहें:

ॐ प्राणाय स्वाहा।
ॐ अपानाय स्वाहा।
ॐ व्यानाय स्वाहा।
ॐ उदानाय स्वाहा।
ॐ समानाय स्वाहा।
ॐ ब्रह्मणे स्वाहा॥

नैवेद्य के बाद जल अर्पण मंत्र

मध्ये पानीयं समर्पयामि।
उत्तरापोशनं समर्पयामि।
हस्तप्रक्षालनं समर्पयामि।
मुखप्रक्षालनं समर्पयामि।

23. फल अर्पण मंत्र

इदं फलं मया देव स्थापितं पुरतस्तव।
तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। फलं समर्पयामि।

24. तांबूल अर्पण मंत्र

पान, सुपारी और उपलब्ध होने पर इलायची अर्पित करें:

पूगीफलसमायुक्तं नागवल्लीदलैर्युतम्।
कर्पूरचूर्णसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। ताम्बूलं समर्पयामि।

25. दक्षिणा अर्पण मंत्र

हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः।
अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। दक्षिणां समर्पयामि।

पूजा के बाद दक्षिणा किसी मंदिर, पुरोहित, जरूरतमंद व्यक्ति या सेवा कार्य में दी जा सकती है।

26. नीराजन या आरती मंत्र

घृतवर्तिसहस्रैश्च कर्पूरशकलैः स्थितम्।
नीराजनं मया दत्तं गृहाण वरदो भव॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। नीराजनं समर्पयामि।

इसके बाद “जय गणेश जय गणेश” या परिवार की परंपरा के अनुसार गणपति की आरती गाएं।

27. मंत्र पुष्प अर्पण मंत्र

हाथ में फूल लेकर कहें:

ॐ गं गणपतये नमः।
सर्वविघ्नविनाशाय सर्वकल्याणहेतवे।
पार्वतीप्रियपुत्राय गणेशाय नमो नमः॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। मन्त्रपुष्पं समर्पयामि।

28. पुष्पांजलि मंत्र

नानासुगन्धपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च।
पुष्पाञ्जलिर्मया दत्ता गृहाण गणनायक॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि।

29. प्रदक्षिणा मंत्र

भगवान गणेश की एक या तीन प्रदक्षिणा करें:

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तानि तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे॥

या:

प्रदक्षिणं करिष्यामि सततं मोदकप्रिय।
मद्विघ्नं हर मे शीघ्रं भक्तानामिष्टदायक॥

आखुवाहन देवेश विश्वव्यापिन् विनायक।
प्रदक्षिणं करोमि त्वां प्रसीद वरदो भव॥

ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः। प्रदक्षिणनमस्कारान् समर्पयामि।

30. गणपति नमस्कार मंत्र

विघ्नेश्वराय वरदाय गणेश्वराय
सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय।
विद्याधराय विकटाय च वामनाय
भक्तिप्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते॥

31. सर्वकार्य सिद्धि प्रार्थना

अभीप्सितार्थसिद्ध्यर्थं पूजितो यः सुरासुरैः।
सर्वविघ्नहरस्तस्मै गणाधिपतये नमः॥

32. क्षमा प्रार्थना मंत्र

पूजा में मंत्र, उच्चारण या विधि की कोई गलती हुई हो तो कहें:

यस्य स्मृत्या च नामोक्त्या तपःपूजाक्रियादिषु।
न्यूनं सम्पूर्णतां याति सद्यो वन्दे गजाननम्॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं गणाधिप।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु ते॥

सरल हिंदी प्रार्थना:

हे भगवान गणेश, मुझसे जाने-अनजाने हुई सभी गलतियों को क्षमा करके मेरी यह पूजा स्वीकार करें।

33. पूजा समर्पण मंत्र

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा
बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै
श्रीगणेशाय समर्पयामि॥

पांच मिनट की सरल गणपति पूजा और मंत्र

समय कम होने पर निम्न छोटा पूजा क्रम अपनाया जा सकता है:

  1. दीपक जलाकर “दीपज्योतिः परब्रह्म” मंत्र कहें।
  2. “वक्रतुंड महाकाय” मंत्र का पाठ करें।
  3. हल्दी, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
  4. फूल या दूर्वा चढ़ाएं।
  5. “ॐ गं गणपतये नमः” 11 बार कहें।
  6. फल, मोदक, लड्डू या गुड़-नारियल अर्पित करें।
  7. आरती और क्षमा प्रार्थना करें।

सभी विस्तृत मंत्र कहना संभव न हो तो प्रत्येक पूजा सामग्री अर्पित करते समय “ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः” कहा जा सकता है।

गणेश मंत्र कितनी बार बोलना चाहिए?

मंत्र सामान्य जप संख्या
ॐ गं गणपतये नमः 11, 21 या 108 बार
वक्रतुंड महाकाय 1, 3 या 11 बार
गणेश गायत्री मंत्र 11, 21 या 108 बार
गणपति के बारह नाम एक या तीन बार
पूजा के समर्पण मंत्र प्रत्येक उपचार के समय एक बार

 

मंत्र की संख्या से अधिक स्पष्ट उच्चारण, एकाग्रता, नियमितता और उसके भाव को समझना महत्वपूर्ण है।

गणपति पूजा मंत्र कहते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • पूजा स्थान को साफ और शांत रखें।
  • मंत्र को धीरे और स्पष्ट रूप से बोलें।
  • जल्दबाजी में सभी मंत्र पूरे करने का प्रयास न करें।
  • अर्थ समझ न आए तो पहले सरल गणेश मंत्र से शुरुआत करें।
  • उच्चारण में गलती होने पर भयभीत न हों।
  • मिट्टी या रंगीन मूर्ति पर द्रव अभिषेक न करें।
  • दीपक, धूप और कपूर का सुरक्षित उपयोग करें।
  • अपनी पारिवारिक पूजा पद्धति और कुल परंपरा का सम्मान करें।
  • जटिल वैदिक या तांत्रिक अनुष्ठान के लिए योग्य पुरोहित का मार्गदर्शन लें।

गणेश पूजन मंत्र हिंदी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. गणपति पूजा का सबसे सरल मंत्र कौन-सा है?

“ॐ गं गणपतये नमः” सबसे सरल और प्रचलित गणपति मंत्र है। इसका प्रतिदिन 11 या 21 बार जप किया जा सकता है।

2. क्या सभी षोडशोपचार मंत्र कहना आवश्यक है?

नहीं। विस्तृत पूजा संभव न हो तो गंध, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य के साथ पंचोपचार पूजा की जा सकती है।

3. प्रत्येक उपचार का मंत्र याद न हो तो क्या कहें?

हर सामग्री अर्पित करते समय “ॐ श्रीमहागणाधिपतये नमः” या “ॐ गं गणपतये नमः” कहा जा सकता है।

4. क्या गणपति मंत्र किसी भी दिन बोल सकते हैं?

हां। गणपति मंत्र किसी भी दिन बोले जा सकते हैं। बुधवार, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी को विशेष जप किया जाता है।

5. गणेश मंत्र के लिए उपवास आवश्यक है?

नहीं। स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किसी भी दिन गणेश मंत्र का जप किया जा सकता है।

6. क्या महिलाएं गणपति पूजा मंत्र बोल सकती हैं?

हां। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी भगवान गणेश के मंत्रों का भक्तिपूर्वक पाठ कर सकते हैं।

7. दूर्वा उपलब्ध न हो तो क्या पूजा हो सकती है?

हां। दूर्वा उपलब्ध न होने पर ताजा फूल, अक्षत या मन से प्रणाम अर्पित किया जा सकता है।

8. मंत्र का उच्चारण गलत हो जाए तो क्या करें?

छोटी उच्चारण त्रुटि होने पर भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। सही पाठ देखकर धीरे-धीरे सुधार करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें।

9. गणेश गायत्री मंत्र कितनी बार बोलें?

गणेश गायत्री मंत्र 11, 21 या 108 बार कहा जा सकता है। नए साधक 11 बार से शुरुआत कर सकते हैं।

10. घर की स्थायी गणेश मूर्ति का आवाहन और विसर्जन करना चाहिए?

प्रतिदिन स्थायी रूप से स्थापित मूर्ति का औपचारिक आवाहन या विसर्जन करना आवश्यक नहीं है। प्रणाम, पूजा और आरती की जा सकती है।

निष्कर्ष

गणेश पूजन मंत्र केवल पूजा की विधि पूरी करने वाले शब्द नहीं हैं, बल्कि सम्मान, कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने वाली प्रार्थनाएं हैं।

विस्तृत षोडशोपचार पूजा में आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, आरती और नमस्कार शामिल होते हैं। सभी मंत्र कहना संभव न हो तो “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र के साथ सरल पूजा की जा सकती है।

मंत्र जप के साथ सत्य, संयम, ईमानदार प्रयास और अच्छा व्यवहार अपनाना ही भगवान गणेश की उपासना की वास्तविक भावना है।

हे भगवान गणेश, हमारी बुद्धि को सही दिशा, मन को स्थिरता और प्रत्येक कार्य को मंगल प्रेरणा प्रदान करें।

गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया!

गणेश मंत्र, वंदना और स्तुति

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