Ganpati Atharvashirsha in Hindi Lyrics PDF

Ganpati Atharvashirsha | Meaning, Benefits & Spiritual Importance

What is Ganpati Atharvashirsha?

Ganpati Atharvashirsha is a sacred Vedic hymn dedicated to Lord Ganesha. It describes Lord Ganesha as the supreme divine consciousness, remover of obstacles, and the source of wisdom and spiritual knowledge.
The Atharvashirsha is widely recited by devotees seeking peace, wisdom, prosperity, spiritual growth, and success in life.

Ganpati Atharvashirsha in Hindi Lyrics & Meaning

Ganpati Atharvashirsha

ॐ नमस्ते गणपतये ॥
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ।
त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ।
त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ।
त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥

हिंदी अर्थ: भगवान गणपति को मेरा नमस्कार है। हे गणेश तुम्हीं प्रत्यक्ष तत्व हो। एकमात्र तुम्हीं कर्ता हो। तुम्हीं एकमात्र धर्ता हो। तुम्हीं एकमात्र हर्ता हो। निश्चय हीं तुम्हीं सब रूपों में उपस्थित ब्रह्म हो। तुम हीं साक्षात नित्य आत्मस्वरूप हो।

ऋतं वच्मि । सत्यं वच्मि ॥

मैं न्यायसंगत कहता हूं। सत्य कहता हूं।

अव त्वं माम् । अव वक्तारम्।
अव श्रोतारम्। अव दातारम्।
अव धातारम्। अवानूचानमव शिष्यम्।
अव पश्चात्तात्। अव पुरस्त्तात्।
अवोत्तरात्तात् । अव दक्षिणात्तात्।
अव चोर्ध्वात्तात्। अवाधरात्तात्।
सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥

हिंदी अर्थ: हे श्री गणेश, आप मेरी रक्षा करो। आप वक्ता अर्थात बोलने वाले की रक्षा करो। आप श्रोता अर्थात सुनने वाले की रक्षा करो। आप दाता की रक्षा करो। आप धाता की रक्षा करो। व्याख्या करने वाले आचार्य की रक्षा करो। आप शिष्य की रक्षा करो। आप पश्चिम से रक्षा करो। आप पूर्व से रक्षा करो। आप उत्तर से रक्षा करो। आप दक्षिण से रक्षा करो। आप ऊपर से रक्षा करो। आप नीचे से रक्षा करो। आप सब ओर से मेरी रक्षा करो। आप चारों ओर से मेरी रक्षा करो।

त्वं वाङ्‍मयस्त्वं चिन्मय:।
त्वमानंदमयस्त्वं ब्रह्ममय:।
त्वं सच्चिदानंदा द्वितीयोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥

हिंदी अर्थ: हे गणपति, तुम हीं वाङ्मय तथा चिन्मय हो। तुम हीं आनंदमय हो। तुम हीं ब्रह्ममय हो। तुम हीं सच्चिदानंद और अद्वितीय हो। तुम हीं प्रत्यक्ष ब्रह्म हो। तुम हीं ज्ञानमय तथा तुम्हीं विज्ञानमय हो।

सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते॥
सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति॥
सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति॥
सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति॥
त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः॥
त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥

हिंदी अर्थ: ये संपूर्ण जगत तुमसे उत्पन्न होता है। ये संपूर्ण जगत तुममें हीं सुरक्षित रहता है। ये सम्पूर्ण जगत तुममे हीं विलय को प्राप्त होगा। ये सम्पूर्ण जगत तुममें हीं प्रतीति हो रही है। तुम हीं भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश हो। तुम हीं चारों प्रकार की वाणी अर्थात परा, पश्चंती, बैखरी और मध्यमा हो।

त्वं गुणत्रयातीतः त्वमवस्थात्रयातीतः॥
त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः॥
त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्॥
त्वं शक्तित्रयात्मकः॥
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं॥
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं
इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं
ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥

हिंदी अर्थ  -तुम प्रकृति के तीनों गुणों सत्व, राजस और तमस, से परे हो। तुम जागृत, स्वप्न और सुषुप्ति इन तीनों अवस्थाओं से परे हो। तुम स्थूल, सूक्ष्म और वर्तमान तीनों देहों से परे हो। तुम भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों से परे हो। तुम मूलाधार चक्र में नित्य स्थित रहते हो। इच्छा, क्रिया और ज्ञान तीन प्रकार की शक्तियाँ तुम्हीं हो। प्रत्येक योगीजन तुम्हारा हीं नित्य ध्यान करते हैं। तुम हीं ब्रह्मा हो, तुम हीं विष्णु हो, तुम हीं रुद्र हो, तुम ही इन्द्र हो, तुम हीं अग्नि हो, तुम हीं वायु हो, तुम हीं सूर्य हो, तुम हीं चंद्रमा हो, तुम हीं ब्रह्म हो, भू:, र्भूव:, स्व: ये तीनों लोक तथा ॐकार वाच्य पर ब्रह्म भी तुम हीं हो।

गणादि पूर्वमुच्चार्य वर्णादि तदनंतरम्॥
अनुस्वारः परतरः ॥ अर्धेन्दुलसितम् ॥
तारेण ऋद्धम्॥ एतत्तव मनुस्वरूपम् ॥
गकारः पूर्वरूपम्॥ अकारो मध्यमरूपम् ॥
अनुस्वारश्चान्त्यरूपम्॥ बिन्दुरुत्तररूपम् ॥
नादः संधानम्॥ संहितासंधिः ॥
सैषा गणेशविद्या॥ गणकऋषिः ॥
निचृद्गायत्रीच्छंदः॥ गणपतिर्देवता ॥
ॐ गं गणपतये नमः॥

हिंदी अर्थ: ‘गण’ के प्रथम शब्दांश ‘ग’ का उच्चारण करने के बाद वर्णों के आदि अर्थात ‘अ’ उच्चारण करें।, उसके बाद अनुस्वार अर्थात ‘म्’ का उच्चारण करें, इसके बाद इसे अधचन्द्र से सुशोभित करें। इस प्रकार गं’ ॐकार से अवरुद्ध होने पर तुम्हारे बीज मंत्र का स्वरूप “ॐ गँ” बनता है। ग-कार प्रथम रूप है, अ-कार मध्य रूप है और अनुस्वार अनिम रूप है। बिंदु उत्तर अर्थात ऊपरी रूप है । नाद संधान होता है, ये सभी आपस में मिलकर “ॐ गँ” ये रूप बनाते हैं। इसे गणेश विद्या कहते है, गणक इसके ऋषि हैं, निचृद-गायत्री छन्द है, गणपति देवता है, वह महामंत्र “ॐ गँ गणपतये नमः” है।

एकदंताय विद्महे ।
वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् 

हिंदी अर्थ: हम एकदन्त को जानते हैं; वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वह दन्ती अर्थात गजानन हमें जागृति प्रदान करें। ये मंत्र गणेश गायत्री कहलाता है।

एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्।
रदं च वरदं हस्तैर्ब्रिभ्राणं मूषकध्वजम्।
रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।
रक्तगंधानुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्।
भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।
आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृतेः पुरुषात्परम्।
एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वर:

हिंदी अर्थ: भगवान् एकदंत अर्थात श्री गणेश चार भुजाओं वाले हैं और वे अपने चारो हाथों में पाश, अंकुश, अभय और वरदान की मुद्रा धारण किए हुए हैं। उनकी ध्वजा पर मूषक का चिह्न है, वे रक्तवर्ण तथा लंबोदर हैं। उनके कर्ण सुप के समान बड़े-बड़े हैं। वे रक्त के समान वस्त्र धारण करने वाले, शरीर पर रक्त चंदन का लेप किए हुए रक्तपुष्पों से पूजे जाने वाले हैं। वे भक्तों पर अनुकम्पा करने वाले हैं, जगत का कारण तथा अच्युत हैं, सृष्टि के आदि में आविर्भूत प्रकृति और पुरुष से परे श्री गणेश जी का जो नित्य ध्यान करता है, वह सभी योगियों में श्रेष्ठ है।

नमो व्रातपतये।
नमो गणपतये।
नम: प्रमथपतये।
नमस्तेऽस्तु लंबोदरायैकदंताय।
विघ्ननाशिने शिवसुताय।
श्री वरदमूर्तये नमो नमः

हिंदी अर्थ: व्रातपति को मेरा नमस्कार है। गणपति को नमस्कार है। प्रथम पति अर्थात शिवजी के गणों के अधिनायक को नमस्कार। लंबोदर, एकदंत, शिवजी के पुत्र तथा श्री वरदमूर्ति को नमस्कार है।

॥ फल श्रुति॥

एतदथर्वशीर्षं योऽधीते। स ब्रह्मभूयाय कल्पते।
स सर्वतः सुखमेधते । स सर्वविघ्नैर्नबाध्यते।
स पञ्चमहापापातप्रमुच्यते 

हिंदी अर्थ: यह अथर्वशीर्ष है। जो भी इसका पाठ करता है वो ब्रह्म को प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता है। उसके सब प्रकार के विघ्न बाधाएं समाप्त हो जाते हैं। वह सब जगह सुख को प्राप्त करता है। तथा वो पांचों प्रकार के महान पातकों तथा उपपातकों से मुक्त हो जाता है।

सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।
प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।
सायंप्रातः प्रयुञ्जानो अपापो भवति।
सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।
धर्मार्थकाममोक्षं च विन्दति 

हिंदी अर्थ: जो भी इसका सायंकाल में पाठ करता है, उसके पुरे दिन के पापों का नाश हो जाता है। प्रात:काल पाठ करने से रात्रि के पापों का नाश हो जाता है। जो प्रातः, सायं दोनों समय इसका पाठ करता है वह निष्पाप हो जाता है। वह सभी जगह विघ्नों का नाश कर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त करता है।

Ganpati Atharvashirsha in Hindi Lyrics PDF
Ganapati Atharvashirsha In English Lyrics PDF
Ganpati Atharvashirsha in Marathi Lyrics PDF
Ganpati Atharvashirsha in Gujarati Lyrics PDF
Ganpati Atharvashirsha in Bangla Lyrics PDF

Spiritual Importance of Ganpati Atharvashirsha

Lord Ganesha is worshipped as the god of wisdom, intellect, beginnings, and obstacle removal.
Devotees believe chanting Ganpati Atharvashirsha:

  • Removes obstacles and negativity
  • Brings mental peace and clarity
  • Improves focus and concentration
  • Enhances spiritual growth
  • Creates positive energy and devotion

Benefits of Ganpati Atharvashirsha

1. Helps Improve Concentration
Students and spiritual seekers often chant it for focus and clarity.

2. Brings Mental Peace
Regular recitation is believed to calm the mind and reduce stress.

3. Removes Obstacles
Lord Ganesha is known as Vighnaharta, the remover of obstacles.

4. Creates Positive Spiritual Energy
Devotees believe the hymn fills the environment with positivity and devotion.

5. Supports Spiritual Growth
The Atharvashirsha is considered highly important in Ganesh worship and meditation practices.

Best Time to Chant Ganpati Atharvashirsha

The most auspicious times include:

  • Wednesday
  • Ganesh Chaturthi
  • Morning after bath
  • During meditation and prayer
  • Before starting important work
  • Ganpati Atharvashirsha PDF Download

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. What is Ganpati Atharvashirsha?
Ganpati Atharvashirsha is a sacred Vedic hymn dedicated to Lord Ganesha.

2. What are the benefits of chanting Ganpati Atharvashirsha?
Devotees believe it brings peace, wisdom, focus, positivity, and obstacle removal.

3. Can I chant Ganpati Atharvashirsha daily?
Yes, many devotees recite it daily with devotion.

4. Which day is best for Ganpati Atharvashirsha?
Wednesday and Ganesh Chaturthi are considered highly auspicious.

5. How long does Ganpati Atharvashirsha take to chant?
It usually takes around 10 to 20 minutes.

6. Can students chant Ganpati Atharvashirsha?
Yes, students often chant it for concentration and wisdom.

7. Can women chant Ganpati Atharvashirsha?
Yes, both men and women can chant it.

8. Is Ganpati Atharvashirsha powerful?
Many devotees consider it one of the most spiritually powerful Ganesh prayers.

9. Where can I download Ganpati Atharvashirsha PDF?
Many devotional websites provide downloadable PDF versions.

10. Does Ganpati Atharvashirsha remove obstacles?
Lord Ganesha is worshipped as Vighnaharta, and devotees chant it for obstacle removal.

11. Is Ganpati Atharvashirsha good for mental peace?
Yes, devotees believe regular chanting helps calm the mind and improve positivity.

12. Can Ganpati Atharvashirsha be chanted before important work?
Yes, chanting before important tasks and new beginnings is considered auspicious.

Ganpati Atharvashirsha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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